आवाज़
दिल से उठती हुई
मगर होटों पे आकर रूकती हुई
कदम तुम्हारी तरफ बद्ठे हुए
कुछ बहके, कुछ सुलझे हुए,
सब कुछ आके ठहर जाता है तुम्हारे पास
दोस्त चाहा था, तुम मिले,
अब प्यार...
one of my fav poems from a bizzare movie...
Monday, September 24, 2007
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